राजस्थान हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि तलाक या विवाह विच्छेद के वैवाहिक विवादों में पारिवारिक न्यायालय जाने के लिए कोई अधिकतम समय सीमा लागू नहीं होती। कोर्ट ने समय सीमा के आधार पर वाद खारिज करने का बूंदी पारिवारिक न्यायालय का फैसला रद्द कर मामला पुनः सुनवाई के लिए लौटा दिया। न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह व न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने एक विवाहिता की अपील पर यह फैसला सुनाया।

अपील में कहा गया कि विवाह 1994 में हुआ, उस समय अपीलार्थी नाबालिग थी। 2006 में अपीलार्थी का तृतीय श्रेणी शिक्षक के पद पर चयन हो गया, जिसके बाद पति-पत्नी में विवाद रहने लगा और 2008 में अपीलार्थी अपने मायके में रहने चली गई। प्रार्थिया अनुसुचित जनजाति की है और उसने 2020 में पारिवारिक न्यायालय में वाद दायर किया, जिसे पारिवारिक न्यायालय ने विवाद 12 साल पुराना होने के कारण मियाद बाहर मानकर खारिज कर दिया था।

नाबालिग को नियुक्ति के पांच साल बाद बर्खास्त करना गलत : हाईकोर्ट

वहीं एक और केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग रहते नियुक्त सफाई कर्मचारी को पांच साल की सेवा के बाद बर्खास्त किए जाने को गलत माना है। कोर्ट ने 20 फरवरी, 2023 को जारी बर्खास्तगी आदेश रद्द कर दिया, वहीं याचिकाकर्ता को पुन: सेवा में लेने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता ने कोई तथ्य नहीं छिपाए, वहीं नियोक्ता ने समय पर आवेदन पत्र की जांच नहीं की। इसके अलावा न चयन प्रक्रिया के दौरान और न नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन किया। सेवा समाप्त करने से पहले याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया।

न्यायाधीश अशोक कुमार जैन जितेन्द्र मीणा की याचिका पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सीपी शर्मा ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2018 में सफाई कर्मचारी के पदों पर भर्ती निकाली गई, जिसमें न्यूनतम 18 वर्ष आयु के अभ्यर्थियों को पात्र माना गया। याचिकाकर्ता उस समय 18 साल से कम आयु का था, लेकिन उसने इस तथ्य को छिपाया नहीं। विभाग ने उसका चयन कर लिया और सितंबर 2018 में नियुक्ति दे दी। उस समय 17 वर्ष 4 माह आयु थी।

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